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Principal Message
महाविद्यालय व्यक्तित्व निर्माण का केंद्र होते है| व्यक्तित्व का निर्माण विचार एवं विवेक के जागृत हुए बिना असंभव है| महाविद्यालय के संस्थापक बाबू राणा प्रताप ने जिन पवित्र संकल्पनाओ के साथ महाविद्यालय की स्थापना की थी उसे अग्रसर करने एवं नवआयाम देने का गुरुतर कार्य स्व0 पंडित राणा किशोर त्रिपाठी ने किया। यही कारण है की आज के इस औद्योगिकीकरण की अंधी दौड़ में भी हमारा महाविद्यालय एक शिक्षा उद्योग न बनकर शैक्षणिक क्षेत्र में निरंतर कीर्तिमान स्थापित कर रहा है| अनेक कुशल प्रशासक, उत्कृष्ट अध्यापक, वैज्ञानिक, चिकित्सक, समाजसेवी, जन प्रतिनिधि, हमारे महाविद्यालय की देन है|

कालचक्र ने महाविद्यालय को अनेक विषम परिस्थितियों में भी ला खड़ा किया, किन्तु महाविद्यालय की आन्तरिक शक्ति एवं मजबूत अन्तर्व्यवस्था ने पुन: दरिगुणित वेग से महाविद्यालय को सामान्य दशा में ले आने में पूर्ण सहयोग किया है| जिसका श्रेय मैं मुक्त कण्ठ से महाविद्यालत की प्रबन्ध समिति, सम्मानित शिक्षकों, कर्मठ कर्मचारियों एवं अनुशासित छात्र/छात्राओं को समवेत रूप से देना चाहता हूँ| हमारी हार्दिक शुभकामना है कि महाविद्यालय निर्बाध गति से प्रगति पथ पर अग्रसर रहे|
                                   शुभकामना सहित .......

डॉ0 एम० पी० सिंह      
(प्राचार्य)